सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें अभिनेता सैफ अली खान और उनके परिवार को भोपाल के अंतिम नवाब की निजी संपत्ति से वंचित कर दिया गया था। यह संपत्ति लगभग ₹15,000 करोड़ मूल्य की है, जिसमें महल, ज़मीन और आभूषण शामिल हैं।
यह विवाद भोपाल रियासत के अंतिम नवाब, हामिदुल्लाह खान की 1960 में मृत्यु के बाद शुरू हुआ था। नवाब की बड़ी बेटी, साजिदा सुल्तान को गद्दी का उत्तराधिकारी घोषित किया गया था, क्योंकि उनकी बड़ी बहन आबिदा सुल्तान पाकिस्तान चली गई थीं। भारत सरकार ने 1962 में साजिदा सुल्तान को नवाब की निजी संपत्ति का वैध उत्तराधिकारी माना था। सैफ अली खान, उनकी मां शर्मिला टैगोर और बहनें सोहा अली खान तथा सबा अली खान साजिदा सुल्तान के वंशज हैं और उन्हें यह संपत्ति विरासत में मिली थी।
हालांकि, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 30 जून 2025 को निचली अदालत के 2000 के आदेश को पलटते हुए मामले को फिर से निचली अदालत में भेज दिया था। इस निर्णय में कहा गया था कि नवाब की निजी संपत्ति मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के तहत बांटी जानी चाहिए, न कि गद्दी के उत्तराधिकार के आधार पर।
इस आदेश को चुनौती देते हुए सैफ अली खान के चचेरे भाई उमर अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी और मामले को निचली अदालत में भेजने के निर्णय को स्थगित कर दिया।
लेखक की राय:
यह मामला भारतीय न्याय व्यवस्था में उत्तराधिकार और संपत्ति वितरण के जटिल पहलुओं को उजागर करता है। राजशाही संपत्तियों के मामले में पारंपरिक उत्तराधिकार नियमों और व्यक्तिगत कानूनों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न्यायिक विवेक और पारंपरिक मान्यताओं के बीच सामंजस्य स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में निचली अदालत को इस मामले में निष्पक्ष और संतुलित निर्णय लेने की आवश्यकता होगी, ताकि सभी पक्षों के अधिकारों का सम्मान हो सके और न्याय की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।




