दिल्ली हाईकोर्ट में यौन अपराधों की बार-बार शिकायत करने वालों का रिकॉर्ड रखने की मांग पर दाखिल पीआईएल

याचिकाकर्ता पहले ही इस मांग के संबंध में दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर चुका था। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों का डेटाबेस तैयार करना प्रशासन और पुलिस का कार्यक्षेत्र है; वे जानेंगे कि कैसे कार्रवाई करनी है।

Must Read

This is an AI-generated image and does not depict real persons or events.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार (8 अगस्त 2025) को राजधानी पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचिका में यह मांग शामिल करने वाले मामले—उन लोगों का डेटाबेस तैयार करने की मांग, जिन्होंने यौन अपराधों की शिकायत एक से अधिक बार दर्ज कराई हो—पर जल्द से जल्द निर्णय लें। न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खण्डपीठ ने जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की और बिना मामले की मेरिट (समीक्षा) पर टिप्पणी किए ही आदेश पारित कर दिया।

याचिकाकर्ता पहले ही इस मांग के संबंध में दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर चुका था। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों का डेटाबेस तैयार करना प्रशासन और पुलिस का कार्यक्षेत्र है; वे जानेंगे कि कैसे कार्रवाई करनी है। न्यायालय ने अंततः याचिकाकर्ता की मांग पर “जल्द और उचित निर्णय” लेने का निर्देश देते हुए याचिका निपटा दी।

यह PIL शोनी कपूर नामक व्यक्ति द्वारा दाखिल की गई थी, जिनके वकील शशि रंजन कुमार सिंह थे। इसमें यह भी कहा गया कि प्रत्येक पुलिस जिला मुख्यालय में उन शिकायतकर्ताओं का रिकॉर्ड रखा जाए, जिन्होंने बलात्कार या अन्य यौन अपराधों से संबंधित एक से अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। इसके अतिरिक्त, आधार कार्ड जैसे पहचान प्रमाण को शिकायत दर्ज कराने वाले प्रत्येक व्यक्ति से अनिवार्य रूप से लिया जाना चाहिए। याचिका में यह आरोप भी शामिल था कि कुछ शिकायतकर्ता ऐसे कानूनों का दुरुपयोग कर रहे हैं।

मेरी राय में इस प्रकार का रिकॉर्ड तैयार करने की प्रासंगिकता और आवश्यकता

यौन अपराधों के मामलों में शिकायतकर्ताओं का डेटाबेस बनाए जाने का मुख्य उद्देश्य न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यदि किसी व्यक्ति ने एक से अधिक बार यौन अपराधों की शिकायत दर्ज कराई है, तो ऐसे रिकॉर्ड से—

  1. जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता — पुलिस को यह परखने में मदद मिलेगी कि शिकायत वास्तविक है या यह किसी प्रकार की पूर्वनियोजित साजिश/दुरुपयोग का हिस्सा हो सकती है।
  2. कानून के दुरुपयोग की रोकथाम — बार-बार शिकायत करने वाले व्यक्तियों की पहचान से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि फर्जी या बदनीयत से दर्ज मामलों का समय पर संज्ञान लिया जाए, जिससे निर्दोष व्यक्तियों को अनावश्यक मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
  3. जांच की दक्षता — यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ या द्वारा बार-बार शिकायत दर्ज होती है, तो पहले के मामलों का संज्ञान लेकर पुलिस जांच को और तेज तथा केंद्रित कर सकती है।
  4. संसाधनों का सही उपयोग — पुलिस बल और न्यायालय के समय और संसाधन सीमित होते हैं; रिकॉर्ड से प्राथमिकता तय करना और गंभीर मामलों पर ध्यान केंद्रित करना आसान होगा।
  5. जन-विश्वास की सुरक्षा — जब जनता देखेगी कि पुलिस और प्रशासन के पास बार-बार शिकायत करने वालों का व्यवस्थित रिकॉर्ड है, तो न्याय व्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा और झूठी शिकायतें दर्ज कराने वालों के लिए निवारक (deterrent) प्रभाव पड़ेगा।

हालाँकि, इस प्रकार का डेटाबेस तैयार करते समय यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि—

  • शिकायतकर्ता की निजता (Right to Privacy, Article 21) का उल्लंघन न हो।
  • डेटा का उपयोग केवल न्यायिक और जांच उद्देश्यों के लिए ही किया जाए।
  • पहचान सम्बंधित सूचनाओं को सुरक्षित और गोपनीय रखा जाए, ताकि वास्तविक पीड़ितों का उत्पीड़न न हो।

इस प्रकार, उचित सुरक्षा उपायों के साथ यह रिकॉर्ड न केवल कानून के दुरुपयोग को रोक सकता है बल्कि वास्तविक पीड़ितों को भी त्वरित और न्यायपूर्ण राहत दिलाने में सहायक होगा।


Disclaimer: The views expressed in this article or blog post are solely for informational purposes and should not be treated as legal advice. Lawyerspress.in assumes no responsibility or liability for any errors, inaccuracies, or incorrect references to case law or provisions of law. Readers are advised to consult qualified legal professionals for advice on specific matters. This website uses royalty-free or AI-generated images. If any reader or user has an objection regarding the content, images, or other material, they must first notify the website administrator. All disputes shall be resolved exclusively by a sole arbitrator.

spot_img
spot_img

Latest News

वकीलों को समन: सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धांत तो सुरक्षित किया, पर संरचना अधूरी छोड़ दी

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल के एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि जाँच एजेंसियाँ केवल इस आधार...
spot_img

More Articles Like This

- Advertisement -spot_img