नई दिल्ली, 18 अगस्त 2025 — भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उन सैन्य कैडेटों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है, जो प्रशिक्षण के दौरान दुर्घटना या चोट के कारण स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं और कमीशन से पहले ही सेवा से बाहर कर दिए जाते हैं। अदालत ने इसे “सामाजिक न्याय का मुद्दा” बताते हुए केंद्र सरकार से बीमा कवरेज, पुनर्वास और वैकल्पिक सेवा विकल्पों पर ठोस जवाब मांगा है।
न्यायालय की पहल
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ ने रिपोर्टों के आधार पर स्वयं संज्ञान लिया। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1985 से अब तक लगभग 500 कैडेट विकलांगता के चलते मेडिकल डिस्चार्ज किए गए हैं।
सरकार को नोटिस
न्यायालय ने रक्षा मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, सामाजिक न्याय मंत्रालय, तीनों सेनाओं के प्रमुखों और पूर्व सैनिक कल्याण विभाग को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि वर्तमान में मिलने वाला ₹40,000 प्रतिमाह एक्स-ग्रेशिया भुगतान अपर्याप्त है।
बीमा और पुनर्वास पर सवाल
अदालत ने पूछा कि क्यों कैडेटों को ग्रुप इंश्योरेंस योजनाओं के दायरे में शामिल नहीं किया जाता। पीठ ने सुझाव दिया कि उन्हें गैर-फील्ड या डेस्क रोल में समायोजित किया जा सकता है, ताकि उनका कौशल और परिश्रम बेकार न जाए।
अधिकार कानून का दायरा
न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि इन कैडेटों को विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत सुरक्षा और लाभ दिए जाने पर विचार होना चाहिए।
अगली सुनवाई
यह मामला अब 4 सितम्बर 2025 को सूचीबद्ध किया गया है। केंद्र सरकार को तब तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।
मुख्य बिंदु
- 1985 से अब तक 500 कैडेट प्रशिक्षण के दौरान विकलांग हुए।
- मौजूदा ₹40,000 प्रति माह मुआवज़ा अपर्याप्त माना गया।
- बीमा कवरेज और पुनर्वास योजनाओं की आवश्यकता पर बल।
- डेस्क जॉब/गैर-फील्ड सेवा में पुनः नियुक्ति की संभावना।
- अगली सुनवाई 4 सितम्बर 2025 को होगी।
लेखक के विचार में:
सैन्य प्रशिक्षण देशसेवा की तैयारी है और इसमें चोट या दुर्घटना जैसी स्थितियाँ असामान्य नहीं। परंतु यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो युवा cadets इस दौरान स्थायी विकलांगता झेलते हैं, उन्हें सेवा से बाहर कर समाज के सहारे छोड़ दिया जाता है। केवल ₹40,000 प्रतिमाह उन्हें न तो आर्थिक सुरक्षा देता है, न ही भविष्य का सम्मान। सुप्रीम कोर्ट ने सही रूप से इसे सामाजिक न्याय का प्रश्न माना है।
यदि सरकार बीमा कवरेज, पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार को सुनिश्चित करती है, तो यह न केवल इन युवाओं के जीवन को संबल देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी यह संदेश देगा कि देश उनके योगदान को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करता है।




