दुनिया भर की अदालतों में हाल के वर्षों में एक नई चुनौती तेजी से उभरकर सामने आई है—कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा उत्पन्न फर्जी कानूनी संदर्भ। वकील तेजी से डिजिटल टूल्स का सहारा ले रहे हैं, लेकिन कई मामलों में यह सहारा उनके लिए ही भारी पड़ गया। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य में एक वकील ने अदालत में ऐसे केस पेश किए जो असल में मौजूद ही नहीं थे। जांच में यह साबित हुआ कि वे सभी संदर्भ AI से उत्पन्न किए गए थे। अदालत ने इसे पेशेवर आचरण का गंभीर उल्लंघन मानते हुए वकील की प्रैक्टिस पर रोक लगा दी। अब वह केवल निगरानी में काम कर सकेंगे और हर तिमाही नियामक बोर्ड को रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा। यह ऑस्ट्रेलिया में इस तरह का पहला मामला है, जिसने वहां की कानूनी बिरादरी को गहराई से हिला दिया है।
अमेरिका में भी ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यूटाह राज्य में रिचर्ड बेडनार नामक वकील ने ChatGPT की मदद से एक अपील तैयार की, जिसमें ‘Royer v. Nelson’ नाम का एक ऐसा केस शामिल था जो कभी हुआ ही नहीं। अदालत ने इसे तुरंत पकड़ लिया और वकील को जिम्मेदार ठहराया। मासाच्यूसेट्स में एक अन्य वकील को तीन नकली केसों का हवाला देने पर दो हजार डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा। कोलोराडो में तो दो वकीलों ने लगभग तीस फर्जी संदर्भ इस्तेमाल कर दिए, जिसके चलते अदालत ने उन पर तीन हजार डॉलर का दंड लगाया और सख्त चेतावनी दी कि AI से मिली जानकारी को बिना जांचे प्रस्तुत करना अदालत की अवमानना के समान है।
स्थिति और गंभीर तब हुई जब अलाबामा में प्रतिष्ठित लॉ फर्म Butler Snow के तीन वकीलों को अदालत ने मामले से ही हटा दिया क्योंकि उन्होंने AI द्वारा उत्पन्न फर्जी संदर्भों को दस्तावेज़ों में शामिल किया था। अदालत ने इसे अत्यंत लापरवाही मानते हुए राज्य बार को जांच का निर्देश दिया। इसी प्रकार इंडियाना में एक वकील को छह हजार डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा। वहां की अदालत ने स्पष्ट किया कि तकनीक का इस्तेमाल वकालत को आसान बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन सत्यापन की जिम्मेदारी हमेशा वकील की ही रहती है।
एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि अब तक दर्ज मामलों में अधिकांश दोष वकीलों को ही दिया गया है, न कि AI कंपनियों को। बिज़नेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 120 से अधिक बार अदालतों में AI-जनित संदर्भ पकड़े गए हैं और कई मामलों में जुर्माने की रकम दस हजार डॉलर से भी अधिक रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कानूनी जगत में AI का इस्तेमाल आने वाले समय में और बढ़ेगा, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि वकील पारदर्शिता बरतें और यदि AI का प्रयोग हुआ है तो उसे क्लाइंट और अदालत के सामने स्पष्ट रूप से रखें।
इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि तकनीक चाहे कितनी भी आधुनिक क्यों न हो, न्याय की नींव सटीक तथ्यों और प्रमाणों पर ही टिकी रहती है। वकीलों के लिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग तभी लाभकारी है जब उसके परिणामों की पूरी तरह से जांच और सत्यापन किया जाए। अन्यथा यह उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा और करियर दोनों को खतरे में डाल सकता है।




